Amitabh Laloriya

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Amitabh Laloriya
किसी नागवार गुज़रती चीज पर मेरा तड़प कर चौंक जाना, उबल कर फट पड़ना या दर्द से…

Amitabh Laloriya
तरक़्क़ियों का फ़साना सुना दिया मुझ को अभी हँसा भी न था और रुला दिया मुझ को !!…

Amitabh Laloriya
लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती ; बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती !!

Amitabh Laloriya
कुछ ताज़गी हो लज़्ज़त-ए-आज़ार के लिए हर दम मुझे तलाश नए आसमाँ की है !!…

Amitabh Laloriya
आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है !! #Waseem Barelvi

Amitabh Laloriya
जब किसी से कोई ग़िला रखना सामने अपने आईना रखना ; मिलना जुलना जहाँ ज़रूरी हो…
Amitabh Laloriya
Amitabh Laloriya

किसी नागवार गुज़रती चीज पर
मेरा तड़प कर चौंक जाना,
उबल कर फट पड़ना
या दर्द से छटपटाना
कमज़ोरी नहीं है
मैं जिंदा हूं
इसका घोषणापत्र है
लक्षण है इस अक्षय सत्य का
कि आदमी के अंदर बंद है एक शाश्वत ज्वालामुखी
ये चिंगारियां हैं उसी की
जो यदा कदा बाहर आती हैं
और
जिंदगी अपनी पूरे ज़ोर से अंदर
धड़क रही है-
यह सारे संसार को बताती हैं।

शायद इसीलिए जब दर्द उठता है
तो मैं शरमाता नहीं, खुलकर रोता हूं
भरपूर चिल्लाता हूं
और इस तरह निष्पंदता की मौत से बच कर निकल जाता हूं
वरना
देर क्या लगती है
पत्थर होकर ईश्वर बन जाने में
दुनिया बड़ी माहिर है
आदमी को पत्थर बनाने में
अजब अजब तरकीबें हैं उसके पास
जो चारणी प्रशस्ति गान से
आराधना तक जाती हैं
उसे पत्थर बना कर पूजती हैं
और पत्थर की तरह सदियों जीने का
सिलसिला बनाकर छोड़ जाती हैं। "

( कन्हैया लाल नंदन जी की एक कविता से )